UPSSSC PET 2026 · Section 1
भारतीय इतिहास
Indian History — सिंधु घाटी से ब्रिटिश राज तक, syllabus के सभी 13 topics | 5 अंक
1857 CE
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
01
सिंधु घाटी की सभ्यता Indus Valley Civilisation · ~2500–1500 BCE
प्रमुख स्थल व उनकी खास पहचान
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान) — सबसे पहले खोजा गया स्थल (1921) |
| मोहनजोदड़ो | सिंध — "मृतकों का टीला", महान स्नानागार, अन्नागार |
| लोथल | गुजरात — गोदी (Dockyard), मनका बनाने का केंद्र |
| कालीबंगन | राजस्थान — जुते हुए खेत के प्रमाण, अग्निकुंड |
| धौलावीरा | गुजरात — जल संरक्षण प्रणाली, 3 भागों में बंटा नगर |
| राखीगढ़ी | हरियाणा — भारत का सबसे बड़ा स्थल |
नगर योजना की संरचना
सिंधु घाटी नगर
↓
दुर्ग (Citadel) — पश्चिम
+
निचला नगर — पूर्व
ग्रिड पैटर्न में सड़कें, पक्की ईंटों के मकान, ढकी हुई जल निकासी व्यवस्था (drainage) — यह इस सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।
याद रखने योग्य बिंदु
- अर्थव्यवस्था: कृषि (गेहूं, जौ) + मेसोपोटामिया से व्यापार (मुहरों के प्रमाण)
- लिपि: चित्रात्मक (Pictographic) — अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है
- धातु: तांबा व कांस्य प्रयोग (लौह का प्रयोग नहीं मिलता)
- पतन के संभावित कारण: बाढ़, नदी मार्ग परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन (आर्य-आक्रमण सिद्धांत अब विवादित)
02
वैदिक संस्कृति Vedic Culture · ~1500–600 BCE
दो कालखंड
| ऋग्वैदिक काल (1500–1000 BCE) |
| अर्थव्यवस्था | पशुपालन प्रधान, गाय ही धन |
| राजनीति | कबीलाई, सभा व समिति द्वारा नियंत्रण |
| उत्तर वैदिक काल (1000–600 BCE) |
| अर्थव्यवस्था | कृषि प्रधान, लोहे का प्रयोग शुरू |
| राजनीति | राजतंत्र मजबूत, महाजनपदों का उदय |
चार वेद
ऋग्वेद — मंत्र/स्तुतियाँ
→
सामवेद — संगीत
→
यजुर्वेद — यज्ञ विधि
→
अथर्ववेद — तंत्र-मंत्र
वर्ण व्यवस्था (सामाजिक संरचना)
ब्राह्मण — शिक्षा/पुरोहित
↓
क्षत्रिय — शासन/युद्ध
↓
वैश्य — व्यापार/कृषि
↓
शूद्र — सेवा
16 महाजनपद: मगध, कोशल, वत्स, अवंति आदि उत्तर वैदिक काल के अंत में उभरे — इनमें से मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा।
03
बौद्ध धर्म — गौतम बुद्ध Buddhism · जन्म 563 BCE
जीवन-यात्रा
जन्म — लुंबिनी
→
ज्ञान प्राप्ति — बोधगया
→
प्रथम उपदेश — सारनाथ
→
महापरिनिर्वाण — कुशीनगर
चार आर्य सत्य
- दुःख है (जीवन में दुःख व्याप्त है)
- दुःख का कारण है (तृष्णा/इच्छा)
- दुःख का निवारण संभव है
- निवारण का मार्ग है — अष्टांगिक मार्ग
अष्टांगिक मार्ग (मुख्य 4)
- सम्यक् दृष्टि
- सम्यक् संकल्प
- सम्यक् वाणी
- सम्यक् कर्मान्त, आजीव, व्यायाम, स्मृति, समाधि
बौद्ध धर्म ने जाति व्यवस्था और यज्ञ-कर्मकांड का विरोध किया, इसीलिए यह वैश्य व शूद्र वर्ग में तेज़ी से लोकप्रिय हुआ।
04
जैन धर्म — महावीर Jainism · जन्म वैशाली, 24वें तीर्थंकर
त्रिरत्न (Three Jewels)
सम्यक् दर्शन
+
सम्यक् ज्ञान
+
सम्यक् चरित्र
पंच महाव्रत
- अहिंसा — किसी जीव को हानि न पहुँचाना
- सत्य
- अस्तेय — चोरी न करना
- अपरिग्रह — संग्रह न करना
- ब्रह्मचर्य (महावीर द्वारा जोड़ा गया 5वां व्रत)
महावीर से पहले 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे, जिन्होंने पहले 4 व्रत दिए थे। जैन धर्म बाद में श्वेतांबर व दिगंबर दो शाखाओं में बंटा।
05
मौर्य वंश — सम्राट अशोक Maurya Dynasty · 322 BCE स्थापना
वंशावली
चंद्रगुप्त मौर्य (322–298 BCE) — संस्थापक, गुरु चाणक्य
↓
बिन्दुसार (298–273 BCE)
↓
अशोक महान (268–232 BCE)
अशोक — कलिंग युद्ध का प्रभाव
261 BCE कलिंग युद्ध
→
भारी नरसंहार देखा
→
युद्ध त्याग
→
बौद्ध धर्म अपनाया
→
"धम्म" नीति अपनाई
अशोक ने अपने आदेश शिलालेखों व स्तंभलेखों पर ब्राह्मी लिपि में लिखवाए। सारनाथ स्तंभ का सिंह-शीर्ष आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।
06
गुप्त वंश Gupta Dynasty · स्वर्ण युग · ~320 CE
वंशावली
श्रीगुप्त / चंद्रगुप्त प्रथम (320 CE) — संस्थापक
↓
समुद्रगुप्त (335–375 CE)
↓
चंद्रगुप्त द्वितीय / विक्रमादित्य (375–415 CE)
समुद्रगुप्त
- "भारत का नेपोलियन" कहा जाता है — विशाल विजय अभियान
- उपलब्धि प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण रचित) में दर्ज
- वीणा वादन में निपुण, कुशल शासक व योद्धा
चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)
- दरबार में "नवरत्न" — कालिदास प्रमुख
- चीनी यात्री फाह्यान इसी काल में भारत आया
- शक शासकों को हराकर "विक्रमादित्य" उपाधि ली
गुप्त काल में कला, विज्ञान (आर्यभट्ट), साहित्य व गणित का अभूतपूर्व विकास हुआ — इसीलिए इसे भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है।
07
हर्षवर्धन Harshavardhana · 606–647 CE
| राजधानी | कन्नौज (थानेश्वर से स्थानांतरित) |
| जीवनी ग्रंथ | हर्षचरित — बाणभट्ट द्वारा रचित |
| स्वयं की रचनाएं | नाटक: रत्नावली, प्रियदर्शिका, नागानंद |
| चीनी यात्री | ह्वेनसांग हर्ष के काल में भारत आया, नालंदा में अध्ययन किया |
| हार | दक्षिण विस्तार के प्रयास में चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय से पराजित |
हर्ष की मृत्यु के बाद उसका कोई उत्तराधिकारी न होने से उत्तर भारत में राजनीतिक विघटन शुरू हुआ — इसी शून्य से आगे चलकर राजपूत काल का उदय हुआ।
08
राजपूत काल Rajput Period · 8वीं–12वीं सदी
प्रमुख राजपूत वंश
| प्रतिहार | कन्नौज — मिहिर भोज प्रमुख शासक |
| चौहान | अजमेर/दिल्ली — पृथ्वीराज चौहान अंतिम शासक |
| परमार | मालवा — राजा भोज (शिक्षा-कला संरक्षक) |
| चालुक्य/सोलंकी | गुजरात — सोमनाथ मंदिर से संबद्ध |
तराइन के युद्ध — निर्णायक मोड़
प्रथम युद्ध 1191 — पृथ्वीराज चौहान विजयी
→
द्वितीय युद्ध 1192 — मुहम्मद गौरी विजयी
1192 की हार ने उत्तर भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
09
सल्तनत काल Delhi Sultanate · 1206–1526 CE
पाँच राजवंश
गुलाम वंश (1206–90) — कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया सुल्तान
↓
खिलजी वंश (1290–1320) — अलाउद्दीन खिलजी
↓
तुगलक वंश (1320–1414) — मुहम्मद बिन तुगलक
↓
सैयद वंश (1414–51)
↓
लोदी वंश (1451–1526) — इब्राहीम लोदी (अंतिम)
महत्वपूर्ण शासक
- कुतुबुद्दीन ऐबक — कुतुब मीनार का निर्माण शुरू किया
- इल्तुतमिश — "इक्ता" व्यवस्था, चांदी का टका चलाया
- अलाउद्दीन खिलजी — बाजार नियंत्रण नीति, मंगोल आक्रमण रोके
याद रखें
- मुहम्मद बिन तुगलक — राजधानी स्थानांतरण (दिल्ली→दौलताबाद), प्रतीकात्मक मुद्रा
- 1526 — इब्राहीम लोदी की पानीपत के प्रथम युद्ध में हार से सल्तनत समाप्त
10
मुगल साम्राज्य Mughal Empire · 1526–1857 CE
प्रमुख शासकों का क्रम
बाबर (1526–30)
→
हुमायूं (1530–56)
→
अकबर (1556–1605)
→
जहांगीर (1605–27)
→
शाहजहां (1628–58)
→
औरंगजेब (1658–1707)
बाबर व अकबर
- बाबर — पानीपत प्रथम युद्ध (1526) में इब्राहीम लोदी को हराया
- अकबर — "दीन-ए-इलाही" व "सुलह-ए-कुल" नीति, मनसबदारी व्यवस्था
- अकबर का दरबार — नवरत्न (बीरबल, तानसेन आदि)
शाहजहां व औरंगजेब
- शाहजहां — ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद का निर्माण
- औरंगजेब — साम्राज्य का अधिकतम भौगोलिक विस्तार, पर धार्मिक असहिष्णु नीतियां
- औरंगजेब के बाद साम्राज्य का पतन शुरू
11
मराठा Marathas · शिवाजी राज्याभिषेक 1674
शिवाजी महाराज व अष्टप्रधान
अष्टप्रधान — 8 मंत्रियों की परिषद (पेशवा, सर-ए-नौबत, अमात्य, वाकयानवीस आदि) प्रशासन में सहयोग हेतु स्थापित की गई।
पेशवा काल
- शिवाजी के बाद वास्तविक सत्ता धीरे-धीरे पेशवाओं (प्रधानमंत्री) के हाथ में आ गई
- बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव प्रथम प्रमुख पेशवा
- 1761 — तृतीय पानीपत युद्ध में अहमद शाह अब्दाली से मराठों की करारी हार, विस्तार को झटका
12
ब्रिटिश राज का अभ्युदय एवं प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
सत्ता स्थापना की कड़ियाँ
1600 — ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापना
→
1757 — प्लासी युद्ध (सिराजुद्दौला हार)
→
1764 — बक्सर युद्ध
→
1765 — दीवानी अधिकार (बंगाल)
प्लासी का युद्ध (1757) भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की नींव माना जाता है — रॉबर्ट क्लाइव की इसमें मुख्य भूमिका रही।
1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
| शुरुआत | 10 मई 1857, मेरठ — चर्बी वाले कारतूसों को लेकर असंतोष |
| प्रमुख नेता | मंगल पांडे (बैरकपुर), रानी लक्ष्मीबाई (झांसी), नाना साहेब (कानपुर), बहादुर शाह जफर (दिल्ली — नाममात्र नेतृत्व), तात्या टोपे, बेगम हजरत महल (लखनऊ) |
| परिणाम | विद्रोह असफल — 1858 में कंपनी शासन समाप्त, सत्ता सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के हाथ |
13
ब्रिटिश राज का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
भूमि राजस्व व्यवस्थाएं
| जमींदारी व्यवस्था | लॉर्ड कार्नवालिस (1793), बंगाल-बिहार — भू-स्वामी जमींदार |
| रैयतवाड़ी व्यवस्था | मद्रास व बॉम्बे — किसान (रैयत) सीधे सरकार को कर देता था |
महालवाड़ी व्यवस्था — उत्तर भारत (अवध, पंजाब) में लागू, गाँव/महाल इकाई के रूप में कर निर्धारण।
सामाजिक सुधार
- राजा राममोहन राय — ब्रह्म समाज, सती प्रथा उन्मूलन (1829)
- ईश्वरचंद्र विद्यासागर — विधवा पुनर्विवाह
- 1856 — बाल विवाह पर विरोध, शिक्षा सुधार (मैकाले शिक्षा नीति 1835)
आर्थिक प्रभाव
- Deindustrialisation — पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग (कपड़ा) का पतन
- Drain of Wealth सिद्धांत — दादाभाई नौरोजी
- रेलवे व टेलीग्राफ का विस्तार — मुख्यतः ब्रिटिश हितों हेतु
- भारत कच्चे माल का निर्यातक व तैयार माल का आयातक बन गया